diet secret of Gamma Pahelwan

“गामा पहलवान {Gamma Pahelwan}” भारतीय इतिहास में जन्मे उन महान हस्तियों में जिन जाते हैं । जिन्होंने 5000 से भी अधिक किस्तिया लड़ी । और एक भी कुश्ती में हारे नहीं है । बता दें, 22 मई 1878 में जन्मे “गुलाम मोहम्मद बॉक्स बट” को बाद में “गामा पहलवान” के रूप में जाना गया । यह भारतीय इतिहास के उन पहलवानों में जिन जाते हैं । जिन्होंने विदेशी पहलवानों को भी धूल चटाई है । आजादी की लड़ाई भारत पर चल रही थी । तब यह महान शख्स विदेशी पहलवानों को धूल चटाने व्यस्त था । इसमें भारतीय इतिहास में भारत का नाम रोशन करने के अलावा कई पुरस्कार भी अपने नाम किया ।

गामा पहलवान एक भारी भरकम डायट प्लान फॉलो करते थे {diet secret of Gamma Pahelwan}। और अपने शारीरिक स्ट्रक्चर को मेंटेन रखने के लिए वह प्रतिदिन घरेलू कुश्ती तथा घरेलू व्यायाम और दंड बैठक किया करते थे । चलिए फिर जानते हैं कि, गामा पहलवान का प्रतिदिन का शेड्यूल दिनचर्या क्या था ।

“टाइम्स ऑफ़ इंडिया” न्यूज़ के अनुसार 5 फुट 7 इंच के ‘गामा पहलवान’ केवल 19 वर्ष की अवस्था में ही पंजाब के मशहूर पहलवान “रहीमबख्श सुल्तानी वाला” को चारों खाने चित कर दिया । इन्होंने अपनी शुरूआती ट्रेनिंग पंजाब के पहलवान “माधव सिंह” से ली थी । इन्होंने शुरू से ही कुश्ती के दाव पेंच में काफी महारत हासिल हो गई थी । इसके पश्चात यह अलग-अलग कुस्तियो में शामिल होते रहे । और विजय होते रहे ।

गामा पहलवान 100 रोटी 6 किलो चिकन और 50 अंडे रोज खाते थे । जो की उनकी डेली रूटीन में शामिल था । वह एक खास प्रकार का एनर्जी ड्रिंक बनाते थे । जिसमें 200 ग्राम बादाम 10 किलो दूध तथा अन्य मेवा भी उसमे शामिल करते थे । गामा पहलवान प्रतिदिन इसका सेवन करते जिस कारण, उनके भारी भरकम शरीर को देखकर पहलवान मैदान छोड़कर ही भाग जाते थे ।

हैरानी वाली बात यह है कि, वह प्रतिदिन 5000 उठक बैठक 10000 पुशअप्स तथा एक भारी भरकम पत्थर को अपने सीने से उठाकर कई बार रखते थे (क्योंकि उन दिनों “जिम” कोई सिस्टम नहीं था ।) यह उनकी दिनचर्या में शामिल था । और वह इस काम को प्रतिदिन करते थे । जिस कारण गामा पहलवान का शारीरिक स्ट्रक्चर बहुत ही मजबूत हो चुका था । और इसी के कारण उन्होंने देश विदेश में 5000 से भी कुस्तियां में विजय हासिल की ।

 Gamma Pahelwan

गामा पहलवान को “शेर-ये-पंजाब” तथा “द ग्रेट गामा पहलवान” के नाम से भी जाना जाता था । बता दे, गामा पहलवान {Gamma Pahelwan} के पिता “मोहम्मद अज़ीज़” भी एक पहलवान थे । जिस कारण गामा पहलवान के खून में ही पहवानी बसी थी । यह वक्त 1947 का था । जब भारत में बंटवारे का समय चल रहा था । बता दे, भारत के पंजाब प्रांत में जन्मे गामा पहलवान को बंटवारे के समय पाकिस्तान में जाना पड़ा रह । भारत के लिए एक बड़ी दुखद विडंबना थी ।

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