short story

यह सच्ची घटना पर आधारित एक घटना है । जिसका वर्णन इस लेख में हम करेंगे । और यह जानने का प्रयास करेंगे कि आखिर उस परिवार की क्या अज्ञानता रही । जिस कारण उसके इकलौती संतान की जान चली गई । यह घटना भारत के बिलासपुर क्षेत्र में उपस्थित तेलीपारा के एक साधारण परिवार की है । समय था, 2004 और यह दिन एक साधारण दिन की तरह था । इस घटना के साक्षीदार मुकेश और नीलिमा और उनका बेटा पवन थे । मुकेश और नीलिमा के नई-नई शादी हुई थी । और वह साधारण एक खपरैल के मकान में रहते थे ।

पवन की उम्र महज 9 वर्ष की थी । लेकिन पवन बहुत ही होशियार और टैलेंटेड बच्चा था । और वह डॉक्टर बनना चाहता था । वह रोज सवेरे स्कूल में सिखाए गए नियम के अनुसार अपनी ड्रेस को पहनता, नहाता, धोता, खाना खाता और बैग लेकर स्कूल जाता था । यह प्रक्रिया मुकेश रोज करता था । 1 दिन की बात है, पवन अपने घर से स्कूल की तरफ जा रहा था । अचानक कहीं से एक कुत्ते ने उससे पैर पर काट लिया । जिस कारण व स्कूल ना जाकर सीधे घर आ गया । और घर पर अपनी मां नीलिमा को बताया । क्योंकि नीलिमा और मुकेश दोनों ही अनपढ़ थे । जिस कारण उन्हें यह घटना एक मामूली घटना लगी । और उन्होंने पवन के घाव पर मिर्ची का लेप लगा दिया । और कुछ समय के लिए पवन को सुला दिया गया ।

पवन को टीकाकरण नहीं किया गया । और साधारण गांव के ओझा द्वारा झाड़-फूंक कर दी गई । गांव में उपस्थित कुछ पढ़े लिखे लोगों ने नीलिमा तथा मुकेश को सलाह दी कि, आप सरकारी हॉस्पिटल में जाकर रेबीज के टीके लगवा ले । लेकिन अज्ञानता वश उन्होंने इस कार्य को पूर्ण नहीं किया । पवन का घाव बड़ा था । जिस कारण पवन को चलने में दिक्कत हो रही थी । लेकिन उसका घाव धीरे-धीरे भरने लगा और कुछ समय बीत गया ।

जिस कुत्ते ने पवन को काटा था । उसके अंदर रेबीज के सिम्टम्स थे । जिस कारण पवन रेबीज नामक बीमारी से ग्रसित हो गया । और उसे तकलीफों का सामना करना पड़ रहा था । (रेबीज एक ऐसी बीमारी होती है जो आपके माइंड में खराबी उत्पन्न कर देती है यह दिमाग की बीमारी है) इस बीमारी से ग्रसित होने के पश्चात पवन, तरह तरह की हरकतें और उटपटांग कहने लगा । जो कि लोगों के समझ से परे था ।

अपने बेटे की ऐसी हालत देखकर नीलिमा और मुकेश ने उसे ओझा, तांत्रिक, बाबाओं के पास ले जाना शुरू कर दिया । लेकिन इन सभी चीजों से उसे कोई लाभ नहीं मिला । वह प्रतिदिन तड़पता और चिल्लाता था । और उसकी इस चिल्लाहट को देखकर गांव तथा परिवार के लोग बेहद दुखी होते थे । इसके पश्चात उन्होंने उसे हॉस्पिटल में भर्ती करने का भी सोचा । और सरकारी अस्पताल भी ले गए । लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी । क्योंकि रेबीज के जीवाणु उसके मस्तिष्क पर पूरी तरह कब्जा कर चुके थे ।

इसी प्रकार पवन के तड़प तड़प कर मृत्यु हो गई । पवन सिर्फ अभी 9 वर्ष का बालक था । और महज 6 महीने में ही उसकी मृत्यु हो गई । जिसके चलते नीलिमा तथा मुकेश शोक में आ गए । कई लोगों ने मुकेश तथा नीलिमा को उसे टीकाकरण करवाने के लिए कहा था । लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया । जिस कारण आज यह नौबत उन्हें देखने को मिली ।

इस घटना से हमें यह सीख लेनी चाहिए । अज्ञानता से दुनिया में तबाही मचती है । बच्चों तथा माता-पिता को पढ़ा लिखा होना जरूरी होता है । यदि आज मुकेश और नीलिमा पढ़े लिखे होते । तो यकीनन का बच्चा पवन बच जाता है । वह सही समय पर सीबीज का टीका लगवा लेते । और शायद आज उनका बच्चा जिंदा होता । लेकिन उन्होंने बाबाओं तथा ढोगियो के पास जाना सही समझा । जिस कारण आज उन्हें यह दिन देखने को मिला ।

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इसमें उस प्यारे से बच्चे की क्या गलती थी ? क्या उसने गलत जगह जन्म लिया ? जिस कारण उसे यह देखने को मिला या फिर उसके कर्म खराब थे । ऐसे बहुत सारे सवाल जो इस घटना के पश्चात आपके मन में उठेंगे । ऐसी घटनाएं भारत के पिछड़े तथा निचले इलाकों में हमेशा होती रहती हैं । लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं की जाती है । भारत में आज भी साक्षरता दर बहुत ही कम है । जिस कारण ऐसी घटना होना आम बात है ।

हमारा इस लेख का उद्देश्य केवल आप तक ऐसी घटनाओं को पहुंचाना है । जिससे आप कुछ सीख सके और आने वाले समय के लिए सजग रहें । हर एक घटना किसी ना किसी जीवन के लिए महत्वपूर्ण होती है । और ऐसी घटनाओं से ही लोगों को सीख मिलती है ।

ये भी पढे …… एक ऐसी सच्ची कहानी, जो आपके अंदर परेशानियों से लड़ने तथा जीने के जज्बे को बढ़ा देगी ।

2 thoughts on “यह स्टोरी भारत के एक साधारण परिवार की हैं, जिस के इकलौते बेटे की जान अज्ञानता की वजह से चली गई ।”

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