Parle G

यह स्टोरी उन दिनों शुरू हुई जब भारत में विश्व युद्ध चल रहा था । और एक आदमी जो भारत को एक नया प्रोडक्ट देने वाला था । उस समय अंग्रेज कैंडी तथा बिस्कुट खाया करते थे । मोहन दयाल जोकि भारत के साधारण घर से थे । उन्होंने एक ऐसे बिस्कुट का निर्माण करने को सोचा । जो कि सभी भारतीय को बड़ी सरलता से उपलब्ध हो जाए । क्योंकि अंग्रेजों द्वारा खाए जाने वाले बिस्कुट बहुत ही महंगा था । और वह केवल अमीरों तक सीमित था । जिस कारण मोहन दयाल ने इस ढोस कदम को उठाया ।

वह जर्मनी चले गए । और वहां से कैंडी बनाने की मशीन ले आए । उन्होंने “इला पारला” नामक स्थान पर एक फैक्ट्री का निर्माण किया । जिसमें उन्होंने भारत की स्वनिर्मित फैक्ट्री में सर्वप्रथम कैंडी बनाई । जिसे लोगों ने खूब पसंद किया गाय । लेकिन ‘रोहन दयाल’ यहां पर ही रनहीं रुके । उन्होंने देखा कि अंग्रेज अपनी चाय के साथ एक बिस्कुट का उपयोग करते हैं । जो कि उन दिनों बहुत ही महंगा था । इस कारण उन्होंने सिर्फ 12 कर्मचारियों और परिवार के लोगों के साथ मिलकर एक बिस्कुट का निर्माण किया । जिसका नाम पारले जी (Parle G) रखा गया ।

पारले जी का उद्देश्य सस्ता और एक अच्छा बिस्कुट तैयार करना था । और वह इस काम में सफल रहे । उन्होंने पारले जी बिस्कुट को लांच किया । और कुछ ही समय में पारले जी ने पूरे भारत के लोगों को आकर्षित कर लिया । उस समय भूखमरी तथा बदहाली का समय था । और भारत में parle-g सबसे सस्ता बिस्कुट हुआ करता था । जिस कारण इसकी लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी ।

डिमांड इतनी बढ़ जाती की सप्लाई चैन को बंद करना पड़ता है । क्योंकि उन दिनों विश्व युद्ध का माहौल था । और भारत में गेहूं की कमी थी । जिस कारण सप्लाई बंद करनी पड़ती थी । सिर्फ 12 कर्मचारियों से इस कंपनी को चला पाना मुश्किल हो रहा था । जिस कारण मोहन दयाल जी ने कुछ कर्मचारियों की संख्या को बढ़ा दे ।

उस समय नया नया टीवी का दौर चल रहा था । और टीवी पर ऐड विज्ञापन आने शुरू हो गए थे । पारले जी ने भी शक्तिमान के साथ एक ऐड किया । जिसे लोगों ने खूब पसंद किया । भारत में शायद ही कोई ऐसा बंदा होगा । जिसने अपने जीवन में पारले जी नहीं खाया होगा । क्योंकि यह भारत ही नहीं अपितु अंग्रेजों का भी फेवरेट बिस्कुट कई सालों तक बना रहा ।

इसे एक ग्लूकोस बिस्कुट के रूप में उतारा गया । युद्ध के दौरान हर सैनिक अपने साथ पारले जी बिस्कुट जरूर रखता था । इससे आप इसकी लोकप्रियता का अंदाजा लगा सकते हैं । 1991 आते-आते पारले जी ने 70% मार्केट को कवर कर लिया । हालांकि इस समय तक और भी कई बिस्कुट मैदान में उतर चुके थे । लेकिन पारले जी सर्वश्रेष्ठ रहा ।

पारले जी पिछले 80 सालों से अपनी कामयाबी पर टिका हुआ है । और आज भी है भारत में सबसे कम कीमत में मिलने वाला बिस्कुट हैं । पारले जी ने आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर के रखा है । पारले जी इतने पुराना होने के साथ-साथ एक भरोसा भी बना पाया है । आज तक उसके स्वाद में कभी भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ । पिछले 80 सालों से पारले जी वैसा ही है । बता दे, आज 2022 में पारले जी (Parle G) जी 2 रुपये में अपने बिस्कुट उपलब्ध करा रहा है । यही पारले जी की सबसे बड़ी सफलता है ।

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One thought on “पारले जी बिस्कुट की सक्सेस स्टोरी में बड़े ही संघर्ष छिपे हैं । जिसका कुछ हिस्सा इस भाग में उजागर किया गया है ।”

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