Royal Bengal Tiger Information In Hindi

बंगाल टाइगर या बंगाली बाघ भारत के राष्ट्र धरोहर होने के साथ-साथ विश्व में अपनी अपार शक्ति, कुटिल शिकारी रणनीति, भारी भरकम शरीर और अपनी सुंदरता की वजह से विश्व विख्यात है । बंगाल टाइगर या बंगाली बाघ पिछले कई सदी से वैज्ञानिकों के लिए शोध करने का केंद्र बना रहा है । आज 21वीं सदी में वैज्ञानिकों तथा मानव जाति ने मिलकर इस “पैंथेरा टाइग्रेस” यानि बंगाली बाघ पर विभिन्न प्रकार के शोध व रिसर्च की है Royal Rengal Tiger Information In Hindi के इस लेख मे बंगाली बाघ जीवन चक्र को महत्वपूर्ण बिन्दु को ध्यान मे रख कर निर्मित किया है |

बाघ की 8 प्रजातियों में से यह एक है । बंगाल टाइगर या बंगाली बाघ का वैज्ञानिक नाम “पैंथेरा टाइग्रेस” है । यह नाम वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस प्रजाति को अलग करने के लिए दिया गया है । जिससे इन्हें किसी एक प्रकार के वर्गीकरण में रखा जा सके । फल स्वरूप बाघ का रिसर्च व शोध करना आसान हो जाता है ।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण : वैज्ञानिक शोध व रिसर्च

“वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड एंड ग्लोबल टाइग्रेस” फॉर्म के अनुसार विश्व भर में पाए जाने वाले बाघों के 70 % जनसंख्या भारत में ही पाई जाती है । अतः 30 % बाघों में शामिल है चाइना, साइबेरिया, भूटान, बांग्लादेश, रसिया इत्यादि ।

2006 के में जारी किए गए डेटा के अनुसार बाघों के जनसंख्या में इजाफा हुआ है । 2006 में इनकी संख्या 1411 तथा 2010 में भारत में इनकी जनसंख्या 1706 मापी गई ।

2014 में एक बार भारत में बाघों की संख्या नापने का फिर से मुहिम चला । उसके पश्चात परिणाम यह निकला कि 2222 बाघ पाए । गए इससे अनुमान लगाया गया कि बाघों की जनसंख्या में लगातार वृद्धि हो रही है ।

इसका कारण आप लगातार विभिन्न प्रकार की जागरूकता और सरकार द्वारा चलाए जा रहे सरकारी कार्यक्रम । घटती शिकार भी इसका एक मुख्य कारण है । अतः इन्हें फलने फूलने का मौका पूरा प्रदान किया जा रहा है । परिणाम स्वरूप इनकी भारत में आबादी हर वर्ष वृद्धि में है ।

नेशनल टाइगर कंजरवेटिव अथॉरिटी” के आधिकारिक व्यक्तियों का अनुमान है कि 2030 तक बाघों की इजाफा होने के साथ-साथ इनकी प्रजनन दर भी बढ़ाई जाएगी । परिणाम स्वरूप इनकी जनसंख्या 2030 तक 2014 से दोगुना होने के अनुमान लगाया जा रहा है ।

नोट – विश्व भर में 29 जुलाई को हर वर्ष अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है ।

नाम रायल बेंगाल टाइगर, बंगाली बाघ, बंगाल टाइगर
वैज्ञानिक नाम पैंथेरा टाइग्रेस”
लंबाई पूंछ सहित 270 से 310 सेंटीमीटर
धरातल से कंधे की ऊंचाई 90 से 110 सेंटीमीटर
आयु आयु 10 से 15
दहाड़ दहाड़ 3 किलोमीटर
वजन 223 किलोग्राम

शारीरिक मापदंड : पहचान व शारीरिक ब्यावरा

बाघ के 8 प्रजातियों सभी प्रजाति और उप प्रजाति का शारीरिक मापदंड भिन्न-भिन्न होता है । बंगाली नर व मादा बाघ दोनों का शारीरिक बनावट अलग होता है । बंगाली टाइगर के शरीर की लंबाई पूछ सहित 270 से 310 सेंटीमीटर होती है । इसमें केवल पूछ की लंबाई 110 सेंटीमीटर तक हो जाती है । धरातल से कंधे की ऊंचाई 90 से 110 सेंटीमीटर होती है । यदि एक वयस्क बंगाल टाइगर का वजन मापा जाए 223 किलोग्राम तक होता है । बंगाली टाइगर की जंगल में आयु 10 से 15 मापी जाति है । लेकिन संरक्षित क्षेत्र में जैसे नेशनल पार्क में इनकी आयु 15 से 20 साल तक हो जाती है ।

नोट बाघ की दहाड़ 3 किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती है । यदि सपाट मैदान हो तो यह आवाज इससे भी दूर तक जाती है।

नरो की तुलना में मादा की कदकाठी कम होती हैं बाघ मादा की पूंछ सहित लंबाई 250 से 265 सेंटीमीटर तक की होती है । और इनका वजन 139. 7 होता है ।

नर और मादा दोनों ही कुशल शिकारी होते हैं । इस प्रजाति के शिकार करने की विधि अन्य बाग प्रजातियों से ज्यादा अलग नहीं है । लेकिन बाघ को सफलता मिलने के मौके दूसरी बड़ी बिल्लियों से अधिक रहते हैं ।

नर व मादा को बड़े ही कुशलता से पहचाना जा सकता है । बंगाल टाइगर का मुख किसी बिल्ली के तरह बड़े आकार में होता है । और इसके शरीर पर पीले पैटर्न के साथ काली धारियां होती हैं । जिसे बंगाल टाइगर को पहचानना आसान हो जाता है ।

बाघ की सबसे बड़ी प्रजाति “साइबेरियन बाघ” है जोकि बंगाल टाइगर से भी कदकाठी में बड़ा होता है ।

प्रजनन व जीवन चक्र : Royal Rengal Tiger Information In Hindi

नर व मादा के प्रजनन प्रक्रिया पर शोध करने के पश्चात या पता चला एक नर के प्रजनन उत्तेजना 4 से 5 साल तथा मादा में 3 से 4 साल में यह प्रक्रिया शुरू हो जाती है । एक बाघिन 3 से 9 सप्ताह के अंतराल में गर्मी में आती है । और 3 से 6 दिनों के भीतर गर्भपात ग्रहण लेती है । मादा बाघिन का गर्भपात 104 से 106 दिनों के अंतराल में हो जाता है । गर्भपात ग्रहण करने के पश्चात मादा बाघिन एक सुरक्षित स्थान जैसे गुफा झाड़ियों पर बच्चों को उत्पन्न करती है ।

बाघिन इन 1 से 4 शावकों को जन्म देती है । जन्म के दौरान शावक का वजन 7.50 से 1600 ग्राम तक होता है । इनकी आंखें बंद होते हैं । उनके दूध के दांत 2 से 3 सप्ताह के अंतराल में आ जाते हैं । 8.50 से 9.50 सप्ताह के अंतराल में ठोस दांत आ जाते हैं । 2 से 3 महीनों के अंतराल में शावक ठोस आहार की तरफ प्रस्थान कर जाते हैं । और वह ठोस आहार ग्रहण करना शुरू कर देते हैं शुरुआती के 6 महीनों में वह अपनी मां से प्रशिक्षण लेते हैं । और शिकार करना सीखते हैं ऐसा वह 2 से 3 सालों तक करते है। उसके पश्चात नर बाघ अपना शक्तिशाली रूप ग्रहण कर लेता है । अतः उन्हें अपने परिवार को छोड़कर जाना होता है और नर बाघ अपने क्षेत्र को छोड़ कर के चले जाते है ।

बाघ अपने क्षेत्र के पहचान विशेष प्रकार के पेड़ पर अपने पंजों से चिन्हित और उस पर अपना मूत्र छिड़काव करके करते हैं । यह एक प्रकार का दूसरे बाघों और जंगली जीवो के लिए संकेत होता है कि यह इलाका किसी दूसरे नर का है । नर बाघ ऐसा अपने क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए और इलाके में दबदबा बनाए रखने के लिए करते हैं । नर बाघ हर 2 से 3 सप्ताह में इस प्रक्रिया को बार-बार दोहराते रहते हैं जिससे कि उनका क्षेत्र संरक्षित रहे ।

अक्सर नर व मादा बाघ उसी समय नजदीक आते हैं जिसमें प्रजनन का समय होता है । यह प्रजनन किसी भी समय पर शुरू हो सकती है । लेकिन रिसर्च व शोधों से पता चला कि नवंबर व अप्रैल के महीने में मादा बाघिन गर्मी में आते हैं । परिणाम स्वरूप मादा बाघ अपने क्षेत्र से नर के क्षेत्र में प्रवेश करती है । और प्रजनन प्रक्रिया शुरू हो जाती है । यह भी देखने को मिला है की नर व मादा बाघिन की गंध को सुनते हुए उसके क्षेत्र पर जाते है ।

कभी-कभी एक ही मादा बाघिन के लिए 2 नर आपस में टकरा जाते हैं । और यह लड़ाई कभी-कभी किसी मौत का कारण भी बन जाती है । अक्सर बाघ लड़ाई से बचते हैं । लेकिन मौका पड़ने पर वह जान की बाजी लगाकर लड़ते हैं । यह खूनी खेल किसी एक की मृत्यु पर ही समाप्त होता है ।

बंगाल टाइगर का इतिहास | Royal Rengal Tiger Information In Hindi

बंगाल टाइगर का इतिहास सदियों पुराना रहा है । 20वीं सदी में एक रिपोर्ट के माने तो 12 फीट लंबे बाघ कल्पना की जा रही थी । वहां पर वैज्ञानिक मंडलों ने जांच भी करना शुरू कर दिया । और किसी अधिकारी द्वारा उस बाघ को गोली मार दी गई । जब उस बाग की लंबाई चौड़ाई नापी गई तो सभी अचंभे में आ गए । इस बाघ की लंबाई 12 फिट मापी गई ।

पिछली कई सदी से बाघ हमारे देश दुनिया विशेष का महत्वपूर्ण अंग रहे हैं । खासकर बंगाल टाइगर भारत का एक राष्ट्रीय पशु है । और इसको अपनी ताकत , सुंदरता और भोजन श्रंखला में सबसे ऊपर रहने की वजह से राष्ट्रीय पशु के रूप में घोषित किया गया ।

यह रोमन साम्राज्य, मुगल साम्राज्य तक अभिन्न पूर्ण रहे हैं । इन्हें विभिन्न प्रकार के चल चित्रों में, अजंता एलोरा की गुफाएं और हिंदू पवित्र मंदिरों में एक देवता के रूप में दर्शाया गया । भारत के कुछ मुद्रा तथा श्रीलंका के एक मुद्रा में जो की बहुत ही प्राचीन मुद्रा थी उसमें बाघों के चित्रण को देखने को मिले है ।

शिकार व भोजन श्रंखला | Royal Rengal Tiger Information In Hindi

बंगाल टाइगर या बंगाली बाघ एक कुशल शिकारी होते हैं । इनके शिकार में शामिल है । हिरण, शीतल, सुअर, नीलगाय, हाथी के बच्चा, भैंस, गाय इत्यादि यह भोजन श्रृंखला के सबसे ऊंचे के शिकारी हैं । यह अक्सर देखने में आया है कि बाघ अपने से छोटे व बड़े सभी जानवरों पर हमला कर देते हैं । कभी-कभी इंसान पर भी हमला करके “नरभक्षी” बन जाते हैं ।

भाग एक शांत प्रिय जानवर है । लेकिन उकसाये जाने पर जहां हर उन प्रजाति पर हमला कर देता है जो इसे उकसाते है । हाथी तक बाघ के हमले से अछूते नहीं हैं । बंगाली बाघ हाथी पर भी हमला कर देता है । बाघ हमेशा अकेले रहना पसंद करता है ।

यह जंगल में उपस्थित जानवर पशु पक्षी जैसे लंगूर, मोर, शीतल, हिरण, भैंस ,भालू, अपने ही प्रजाति के जानवर इत्यादि पर हमला करने से बाघ कभी पीछे नहीं हटते है । हालांकि बाघ अपने ही प्रजाति को खाते हुए बहुत ही कम नजर आते हैं ।

हाल ही में किए गए शोध व रिसर्च : बंगाल टाइगर जनसंख्या

“माधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान” के अनुसार 2010 में नर मादा व शावक को मिला करके भारतीय बंगाल टाइगर की 25 00 की आबादी होने का अनुमान है इस अवधि का कुल 1165 से 16 67 तक केवल भारत में ही होने का अनुमान है 199 से 419 तक बंगाल टाइगर बांग्लादेश में पाए जाते हैं । जिसमें केवल सुंदरवन में 100 से 195 के बीच और भूटान में 89 से 85 के बीच की आबादी है । बाकी जनगणना जारी है ।

“भारत सरकार टाइगर रिसर्व” 1972 के अभियान को लगातार प्रगति की ओर बढ़ा जा रहा है । परिणाम स्वरूप वर्तमान काल में बंगाल टाइगर की जनसंख्या में वृद्धि आई है । यदि 2010 से 2021 में तुलना की जाए तो मौजूदा हाल के अनुसार इनकी संख्या में 10 % की वृद्धि हुई है ।

बंगाल टाइगर का महत्व | Royal Rengal Tiger Information In Hindi

बाघ की सभी प्रजातियां भारत तथा विश्व के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं । यह विश्व के धरोहर है और हमारे पर्यावरण को संतुलन में बनाए रखने के लिए बहुत ही ज़रूरी है। अतः हमें इन शांत जानवरों को इनके क्षेत्र पर छोड़ना ही सही रहेगा ।

हालांकि कई प्रयासों से 2021 में इनके शिकार में कमी आई है । लेकिन इनकी जनसंख्या में ज्यादा वृद्धि नहीं हुई । इसका कारण घटता आवास है । बंगाल टाइगर के क्षेत्र सीमित होते जा रहे हैं । अतः मानव जनसंख्या उनके क्षेत्र पर कब्जा कर रहे हैं ।

बंगाल टाइगर को भारत के राष्ट्रीय पशु के रूप में क्यों चुना गया?

बंगाल टाइगर अपारशक्ति, गठीला शरीर, मजबूत कदकाठी, निपुण शिकारी, भोजन श्रंखला में सबसे ऊपर, शक्ति का प्रतीक होने की वजह से इसे भारत का राष्ट्रीय पशु चुना गया ।

बंगाल टाइगर की औसतन उम्र कितनी होती है?

बंगाल टाइगर की औसतन उम्र परिस्थिति पर निर्भर करती है । यदि इन्हें जंगल में रखा जाए तो यह 10 से 20 सालों तक राज करते हैं । यदि इन्हें संरक्षित क्षेत्र पर या किसी जू चिड़िया घर में रखा जाए तो यह 20 से 25 सालों तक आराम से अपना जीवन निकाल देते हैं ।।उसके पश्चात वृद्ध होने के बाद मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं ।

बंगाल टाइगर वह बंगाली बाघ की शारीरिक लंबाई कितनी होती है ?

एक वयस्क बंगाल टाइगर के शारीरिक लंबाई पूछ सहित 270 से 310 सेंटीमीटर मापी गई है ।

बंगाल टाइगर के प्रजनन का समय कब होता है ?

इनका कोई निश्चित समय नहीं है लेकिन रिसर्च से पता चला है कि यह नवंबर व अप्रैल के महीने में ज्यादा सक्रिय रहते हैं ।

क्या बंगाल टाइगर अपने पिता होने का फर्ज निभाते हैं ?

अक्सर ऐसा कभी नहीं होता है । टाइगर अकेले रहना पसंद करते हैं । और वह अपने बच्चों को परवरिश में कोई भी मदद नहीं करते । परवरिश मादा बाघिन करती है । जो उन्हें 2 से 2.5 सालों तक प्रशिक्षण भी देती है और उनका लालन पोषण भी करती है ।

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