बाघ, जीवनचक्र, जानकारी, भोजन श्रंखला,पारिवारिक स्थिति, कहां पाए जाते, Information about tiger in hindi

आज दुनिया भर में बाकी बाघ केवल 60 हज़ार ही बचे हुए हैं । जिसमें से कुल 40 हज़ार भारत में पाए जाते हैं । इन्हें पहचान पाना बहुत ही आसान है । इनके शरीर पर धारीनुमा काले कलर की पट्टियां पड़ी होती हैं । और पूरे शरीर में पीले रंग का उभार होता है । इनका शरीर गठीला होता है । बाघ की दहाड़ 9 से 13 किलोमीटर तक सुनी जा सकती है । इनके मुख पर बिल्लीनुमा संरचना बनी होती है । और मुख पर मुंह पर कई बड़े बड़े बाल हो गए होते हैं जिन्हें मूंछ कहते हैं Information about tiger in hindi के इस भाग मे आप बाघ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी कुछ बिन्दुओ पर द्वारा बताया जाएगा |

बाघ शिकार करने का गुण अपनी मां मादा बाघिन से सीखते हैं । एक बार में 2 से 3 बच्चे हैं जन्म देते हैं । और 2.5 सालों तक इनका अच्छे से प्रशिक्षित करने के पश्चात इन्हें छोड़ दिया जाता है । तब ये एक बेहतर कुशल शिकारी बन चुके होते हैं ।

बाघ का जीवन चक्र

नर व मादा बाघ उम्र जंगल में 10 से 15 साल आती । क्योंकि जंगल में शिकारी बहुत होते हैं । इन्हें सबसे ज्यादा खतरा मानव जाति के शिकार होने से है । उसके पश्चात इनके सगे संबंधी रिश्तेदार और दूसरे बाघ भी एक बात को मार करके उसका इलाका छीन ना चाहते हैं ।

बाकी माता करीब 150 से 250 किलोग्राम की होती है ।वह 2 से लेकर 3 बच्चे तक जन्म दे देते हैं । पैदा होने के समय शावक 3 से 15 किलोग्राम के बीच में लगभग होते हैं । लेकिन यह अगले ही 1 महीने में अपने शरीर का दोगुना हो जाते हैं । विडालवंशी की यह प्रजाति बहुत तेजी से बढ़ती है ।

मादा बाघिन अपने शावक को 2 से 2.5 साल तक अपने साथ रख कर शिकार के गुणों को सिखाते हैं । जब सावक अपने शुरुआती दिनों में होता है । तब मादा बाघिन उसे अपना दूध पिलाती है । उसके पश्चात जब सा वक्त थोड़ा बड़ा हो जाता है । तब उसे शिकार के स्थिति को समझाते हुए शिकार करना बताती है ।

शिकार के गुण सिखाते समय मादा बाघिन अपने शिकार के सावर को पकड़कर अपने बच्चे के सामने उपस्थित करती है । जिससे वह एक जिंदा शिकार को मारने का तरीका सीख सके । इसी प्रकार मादा बाघिन अपने शावक तैयार करती हैं । जिससे वह एक उम्दा शिकारी बन सके । और इस जंगल में सरवाइव (जिंदा) कर सके ।

शिकार व शिकार करने की विधि

नर व मादा बाघ दोनों ही एक कुशल शिकारी होते हैं । यह अक्सर आपको अकेले घूमते हुए मिलेंगे । यह झुंड में रहने वाले जीव नहीं इनके मुख्य शिकार चीतल, हिरण ,भैंस, गाय, बकरी, नीलगाय, सुअर इत्यादि इन के मुख्य शिकार के रूप में हैं ।

यह़ घात लगाकर शिकार करने वाले जानवर है । इन्हें चौका कर शिकार करना बहुत पसंद है । नर व मादा बाघ अक्सर हमला पीछे से करते हैं । और यह शिकार की गर्दन पकड़ कर तोड़ने का भरकम प्रयास करते हैं । और अंततः अपने भारी और सुडौल वजन के कारण अपने शिकार की गर्दन तोड़ कर तोड़ देते है ।

भाग किसी भी शिकार का लंबे समय तक पीछा नहीं कर सकते क्योंकि भारी-भरकम शरीर होने की वजह से भाग छोटी दूरी पर ही अपनी अधिकतम रफ्तार दिखा सकते हैं । अतः ज्यादा दूरी तक तय नहीं कर पाते कारणवश यह घात लगाकर शिकार करते हैं । और शिकार के पास छुप कर बैठे रहते हैं।धीरे धीरे शिकार के नजदीक जाते हैं तत्पश्चात शिकार पर हमला कर देते हैं ।

बाघ और बाघिन की पारिवारिक स्थिति

यह अकेले रहना ज्यादा पसंद करते हैं लेकिन जब मीटिंग का समय होता है तब यह एक दूसरे के पास आते हैं और कई किलोमीटर से अपने सूंघने की क्षमता से यह एक दूसरे का पीछा करते हैं । नर बाघ मादा का पीछा करता है तथा मादा बाघ नरो के इलाकों में आ जाती है ।

परिणाम स्वरूप दोनों जीवो की मीटिंग होती है । उसके पश्चात उनकी प्रजाति का वंश आगे बढ़ता है । अतः शावक की उत्पत्ति होती है । मीटिंग के दौरान लगभग 15 से 30 दिन तक मादा बाघ है नर के इलाके में ही रहती है । और हर कुछ समय पश्चात मीटिंग करती है । जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनकी आने वाली पीढ़ी तैयार है ।

कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां भी बनती हैं कि जब मादा बाघिन कई नारों के इलाकों में जाकर मीटिंग करते हैं । अतः कई नर मादा बाघिन के पीछे होने की वजह से नारों में आपसी झगड़ा हो जाता है । जिसकी गूंज पूरे जंगल में सुनाई देती है । कभी-कभी तो यह खूनी खेल किसी की मृत्यु का कारण बन जाता है । और एक बाघ दूसरे भाग को मारने में कभी पीछे नहीं हटता ।

भाग की एक खास आदत होती है । वह अपने दुश्मन को भी शिकार की तरह समझता है। और जब तक उसे जान से मार नहीं देता पीछे नहीं हटता है। आपने कहा की कहावतें सुनी होंगी बाघों की लड़ाई हमेशा मरते दम तक होती है । ऐसे भी कई मौके देखे गए हैं । जहां पर बाघ लड़ने के बजाय गुर्रा कर ही सामने वाले विरोधी को अपनी ताकत का अंदाजा दिखा देते हैं ।

बाघ अक्षर लड़ाई झगड़ा से बचने का प्रयास करते हैं । लेकिन इनकी तुलना किसी और प्रजाति से की जाए तो बाघ बहुत ज्यादा झगड़ालू होते हैं । वह जरा जरा से ही झगड़ा शुरू कर देते हैं । क्योंकि वह अकेले रहना पसंद करते हैं परिणाम स्वरूप बहुत-बहुत गुस्से में होते हैं । यह प्रजाति बहुत एक्टिव होती है और एग्रेसिव होती है ।

नर व मादा प्रधानता

नर और मादा में प्रधानता की बात की जाए तो नर बाघ मादा बाघिन में नर बाघ प्रधान होता है । बाघ का वजन 300 किलो तक चला जाता है । तथा मादा बाघिन का वजन 175 से 230 तक ही जाता है । अतः भारी वजन सुडोल और गठीला शरीर के कारण एक नर मादा से ज्यादा ताकतवर होता है ।

परिणाम स्वरूप नर बाघ प्रजाति में एक प्रमुख किरदार होता है । जोकि मादा की मीटिंग के समय सहायता करता है । और अपने वंश को आगे बढ़ाने के लिए तथा दूसरे जानवरों से रक्षा के लिए नर बाघ का होना बहुत जरूरी है ।

कहां पाए जाते हैं

बाघ मुख्यता दलदली क्षेत्रों और घास के मैदानों में रहना पसंद करते हैं । क्योंकि इस जगह पर यह शिकार में बड़ी आसानी होती हैं ।

बाघ मूलतः एशियाई जानवर है जो कि आपको भारत, भूटान, चीन, बांग्लादेश, एशिया के कुछ भाग रसिया इत्यादि जगहों पर आपको देखने को मिलेगी । हालांकि अत्यधिक शिकारी होने के कारण इनकी तादाद में कमी आई है ।

1973 टाईगर रिजर्व गवर्नमेंट के प्रयासों से इन जीवों को बचाने का भरकम प्रयास किया जा रहा है । टाइगर के रिजर्व के लिए कई प्रकार के बाड़े और संरक्षित क्षेत्र भी तैयार किए गए हैं जिनसे इन जीवो को फलने फूलने का मौका मिल सके ।

जिन इलाकों में बाघों की कमी है उन इलाकों में रिहैबिलिटेट तथा रीजेनरेशन के द्वारा उन इलाकों में फिर से बाघों को बसाया जा रहा है । इन जीवों की जिम्मेदारी हम मानव जाति के ऊपर ही है ।

बाघ की महत्वता

हमारे पर्यावरण व इकोसिस्टम को चलाए रखने के लिए बाघ का होना । बाघ का योगदान देना बहुत ही जरूरी है । यह हमारे पर्यावरण के इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । और प्राकृतिक स्थिति को संतुलन में बनाए रखते हैं ।

हालाकि शिकारियों की वजह से इन चीजों का शिकार होने लगा । परिणाम स्वरूप, पर्यावरण में भीषण विषमता दिखाई देने लगी । घास चरने वाले जीवो की तादाद बढ़ने से मानव संसाधनों में कमी आई । अतः इकोसिस्टम को पुनः बनाए रखने के लिए बाघ का होना अत्यंत आवश्यक है ।

यदि आने वाले समय में यह प्रजाति नष्ट हो जाती है । या विलुप्त हो जाती है । तो इससे मानव जाति को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा । भारी प्राकृतिक विषमता दिखाई देगी । प्रलय भी आने की संभावना बढ़ जाएगी । भुखमरी बढ़ने के संभावना बढ़िगी । तो हम मानव जाति को यह प्रजाति को बचा के रखना अत्यंत आवश्यक है।

बाघ प्रजाति का इतिहास

यदि इस प्रजाति की बात की जाए तो यह मानव प्रजा से भी सभी पुरानी है । इसने कई सदियों को अपने अंदर समेटे है। और इस मुकाम तक अपने आप को ढाला है कि वह पीढ़ी दर पीढ़ी अपने में बदलाव करके आगे बढ़ सके ।

वैज्ञानिक शोध के अनुसार भाग का डीएनए प्राप्त करने पर यह पाया गया कि भाग मूलतः चीन में पाए जाते थे । तत्पश्चात उन्होंने वहां से पलायन किया उसके पश्चात यह भारत में आए भारत से चीन के जिस रास्ते से वह भारत आएं । उसे सिल्क रोड कहां गया । ऐसा वैज्ञानिक शोध में पाया गया।

वैज्ञानिक शोध के अनुसार इतिहास में साइबर टूथ नाम का एक भाग में पाया जाता था । इसकी दांत की लंबाई अत्यधिक अधिक होने की वजह से वह जानवरों को बड़ी आसानी से मार पाता था । अतः एवोल्यूशन के दौरान बाघों में परिवर्तन हुआ । तत्पश्चात उनकी नई प्रजातियां उत्पन्न हुई जिनमें से आज हम एक प्रजाति को जानते हैं ।

बाघ का शारीरिक बनावट | Information about tiger in hindi

बाघ के शारीरिक बनावट की बात की जाए तो बाघ पैदा होने के समय सिर्फ 1 से 3 से किलोग्राम का होता है । तथा यह अपने 1 महीने के ही दिनों में अपने शरीर का दुगना हो जाते हैं । नर बाघ का विशाल जबरा होता है । और इनका वजन 300 किलोग्राम से ज्यादा हो सकता है । और इनके पंजों की चौड़ाई 7 सेंटीमीटर तथा लंबाई 7 सेंटीमीटर मान सकते हैं । यह यह साइज के अनुसार घटता बढ़ता रहता है।

बाकी बाइट फोर्स में काटने की क्षमता 770 पाउंड के आसपास दबाव बना लेते हैं । और यह अपने जबड़े की ताकत से किसी की भी हड्डी को चटका सकते हैं । उनकी आगे की तरफ 2 दांत निकले और के 9 शिकार करने में और शिकार को फाड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।

इनकी पूंछ रडार की तरह काम करती है । जो इन्हें भागने और संतुलन बनाए में रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । जिसकी लंबाई 1 मीटर लगभग हो जाती है इनके शरीर पर विभिन्न प्रकार के बाल हो गए होते हैं । और इनका शरीर पीले रंग का होता है जिसमें काले कलर की धारियां पाई जाती हैं ।

नोटसाइबेरियन बाघ दुनिया का सबसे बड़ा है । जिसका वजन 350 से लेकर 400 किलोग्राम तक हो सकता है ।

बाघ की प्रजाति | Information about tiger in hindi

यदि बड़े बिल्लियों की बात की जाए तो बाघ पंथेरा प्रजाति का है । पंथेरा वैज्ञानिक नाम है । इस प्रजाति की यह एक विशाल और आक्रमक जानवर है विडालवंशियो में और भी कई प्रजाति आती हैं । जोकि इन्हीं के तरह जंगलों में राज करने के लिए काबिल है ।जंगलों का राजा शेर, चीता, तेंदुआ, क्रोगर, पहाड़ी शेर, जैगुआर, यह सभी भोजन श्रंखला के सबसे ऊंचे पायदान पर रहने वाले शिकारी जीव हैं ।

वैज्ञानिक विश्लेषण | Information about tiger in hindi

वैज्ञानिकों ने कई सालों के अध्ययन के पश्चात कुछ शोध प्रकाशित किए । परिणाम स्वरूप इन्हें विभिन्न प्रकार की वर्गीकरण क्षेत्रों में बांटा गया । तथा अलग-अलग प्रकार से इन्हें अलग-अलग क्षेत्र में जाना जाता है । वैज्ञानिक वर्ग में इनका नाम कुछ और है और साधारण बोलचाल की भाषा में उनका नाम कुछ और है तो आप नीचे तालिका देख सकते हैं ।

मानव जाति की सुरक्षा | Information about tiger in hindi

कभी-कभी ऐसा भी देखा गया है कि बाघ मानव जाति पर भी हमला करते हैं । कई ऐसे मामले देखे गए हैं । जिसमें बाघ ने मनुष्यों पर भी हमला किया है । इसे सुरक्षात्मक दृष्टि से आपसे देख सकते हैं यदि आप किसी के इलाके में जाएंगे और वह आपसे ताकतवर है तो आपको यकीनन भगाने का प्रयास अवश्य करेगा ।

इसका कई कारण हो सकते हैं कभी कदार मनुष्य को शिकार समझना, मनुष्य बाघों पर शिकार करते हैं, ऐसे इलाकों में उपस्थित होना जहां पहले से ही बाघ हैं यह भी एक कारण हो सकता है ।

क्योंकि यह जीव शांति पसंद जीव है परिणाम स्वरूप यह अपने इलाके में आने वाले अधिकतर उन चीजों पर हमला कर देते हैं जो इन्हें शिकार की तरह दिखती है ।

कुछ विशेष सावधानियां | Information about tiger in hindi

यदि आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां पर बाघों की तादाद ज्यादा है । जैसे सुंदरवन तो आप कुछ सावधानियों को बर्थ सकते हैं ।

यदि आप ऐसे इलाके में काम कर रहे हैं जहां पर बाघ है या फिर आप घूमने जाते हैं । यदि उनके इलाके पर तो आप अपने पीठ के पीछे एक मुखौटा जरूर लगाएं । जिससे बाघ को यह लगता है कि आप उसे देख रहे हैं और आप पर वह हमला नहीं करता ।

कभी बाघ से सामना हो जाए और बाघ आपके ऊपर हमला करने पर उतारू हो जाए । तो आप शांत बने रहें । भागने की कोशिश ना करें । क्योंकि यदि आप भागे तो यकीनन बाघ आपको मार देगा क्योंकि आप बाघ से तेज नहीं भाग सकते । अपने आसपास नजदीकी चीजें देखें कोई बड़े डंडे या भाले नुमा चीज को उठा ले और हो सके तो किसी पेड़ पर चढ़ जाएं ।

बाघ से आमना-सामना हो जाए तो आप उस पर नजर हमेशा बनाए रखें । कभी उसे पीट मत दिखाएं पीट देखने पर बाघ आपको एक शिकार के रूप में समझेगा और और आप पर वह हमला कर देगा ।

नोट – बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है । तथा यह भारत का गौरव है । हम भारतीय होने के नाते अपने इस गौरव को बचाना हमारा कर्तव्य । हालांकि शिकार की संख्या में कमी आई है । लेकिन अभी भी कुछ दुर्गम इलाकों में इनका शिकार होता है । तो यह मानव जाति की जिम्मेदारी है कि हमें प्रजाति को अपने उद्गम भविष्य के लिए बचा कर रखना है ।

Information about tiger in hindi के किस भाग में इस गौरवशाली जानवर के विषय में बताते हुए हमें गर्व महसूस हुआ । यदि आप इस लेख से जुड़े कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो आप कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं ।

Information about tiger in hindi भाग में बाघ के जीवन चक्र को समझाते हुए कुछ विशेष बिंदु को आधार बनाया गया है । इन बिंदुओं के आधार पर भाग के जीवन चक्र को समझना आसान हो जाएगा । यह बहुत शांतिप्रिय जीव है और यह किसी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते हैं । लेकिन हम मानव जाति को यह समझना होगा कि यह हमारे एनवायरमेंट के लिए कितने महत्वपूर्ण क्यों है अतः इन्हें बचाकर रखना हमारी जिम्मेदारी है ।

बाघ कितने प्रकार के होते हैं

ज्ञात जनकरी के अनुसार 9 प्रकार के बाग है | बंगाल टाइगर, साइबेरियन टाइगर, सुमतरन टाइगर, कपियन टाइगर,जवान टाइगर , इंडोनेस टाइगर , साउथ चाइना टाइगर, बाली टाइगर, मलयन टाइगर

बाघ की लंबाई कितनी होती है ?

एक वयस्क बाघ की लंबाई 270-310 सेमी होती है |

बाघ को राष्ट्रीय पशु क्यों कहा जाता है?

शालीनता, दृढ़ता, फुर्ती और अपार शक्ति के कारण ‘रॉयल बंगाल टाइगर’ को भारत का राष्ट्रीय पशु माना जाता है

बाघ का वैज्ञानिक नाम क्या है ?

बाघ का वैज्ञानिक नाम ‘पैंथेरा टिगरिस लिन्नायस’ है |

भारत में सबसे अधिक बाघ किस राज्य में है

देश में सबसे ज्यादा बाघ मध्य प्रदेश में मौजूद हैं |

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