Arunima Sinha

चलिए फिर आज मैं, आपको एक ऐसी स्टोरी बताता हूं । जो कि सत्य होने के साथ-साथ आपको प्रेरणा बल और जीने की इच्छा प्रबल कर देगी । यह कहानी भारत के एक ऐसे महिला पर्वतारोही की है । जिनका एक पैर ना होने के बावजूद उन्होंने एवरेस्ट जैसे कठिन चढ़ाई को पार किया । और एक कीर्तिमान स्तंभ स्थापित करने में कामयाब रही । यहां हम भारत की एक प्रसिद्ध पर्वतारोही “अरुणिमा सिन्हा (Arunima Sinha)” के विषय में तथा उनके संघर्ष के विषय में आपको रूबरू कराने जा रहे हैं । यह स्टोरी यकीनन आपके दिमाग में नेगेटिव विचार को पनपने नहीं देगी । अरुणिमा एक महिला होने के बावजूद भी उन्होंने संघर्ष करते हुए एवरेस्ट की चोटी तक पहुंची हैं । चलिए फिर उनके संघर्ष पलों को दोहराते हैं ।

अरुणिमा एक समय ट्रेन से कहीं जा रहे थी । तभी कुछ गुंडों ने उन्हें ट्रेन से नीचे फेंक दिया । जिस कारण वह पूर्ण रुप से डैमेज हो गए । और ट्रेन के बगल में पूरे 36 घंटे जख्मी हालत में पड़े रही । हालांकि उनके पास से लगातार कई ट्रेनें गुजरती रहे । लेकिन उस लाचार महिला पर किसी का ध्यान नहीं गया । कुछ स्थानीय लोगों ने अरुणिमा को देखा । और पास के स्थानीय अस्पताल में भर्ती करा दिया । अरूणिता पूर्ण रूप से अपने पैर से डैमेज हो चुकी थी । जिस कारण अस्पताल में उनका पैर काटना पड़ा । हालांकि स्थानीय अस्पताल में यह सुविधा ज्यादा अच्छी नहीं थी । इस कारण उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया । और 6 महीनों की इलाज के बाद अरूणिता पूर्ण रूप से ठीक हो गई ।

लेकिन यह महिला शांत बैठने वालों में से नहीं थी । इन्होंने एवरेस्ट की चढ़ाई को पार करने का मन बना लिया । और उसके पश्चात कुछ जरूरी के साधन और इक्विपमेंट लेने के बाद, वह कुछ लोकल गाइड के जरिए, एवरेस्ट की चढ़ाई को पार करने के लिए तैयार हो गई । उन्होंने इस चढ़ाई में बहुत ही परेशानियों का सामना किया । क्योंकि हाल ही में उनका पैर कट गया था । और उन्हें एक मेडिकल प्रोसीजर के जरिए राड लगाकर नया पैर निर्मित किया गया । और एवरेस्ट की ऊंचाई 8848 किलोमीटर कोई मामूली चढ़ाई नहीं है । और इस संघर्ष चुनौती को अरुणिमा ने बड़े ही सूज बुझ और समझदारी से पूरा किया । हालांकि चढ़ाई के दौरान उन्हें कई-कई दिन तक रेस्ट करना पड़ जाता था ।

चढ़ाई के दौरान एक बार तो ऐसा हुआ । जब उनके पैर से खून निकलने लगा । क्योंकि सर्जरी हाल ही में हुई थी । और उन्हें बहुत ही समस्या हो रही थी । लेकिन उनके मन में जुनून भरा हुआ था । जिस कारण पर लगातार आगे बढ़ते ही जा रही थी । एक समय आया । जब वह एवरेस्ट की आखरी चोटी पर पहुंच गए । और उन्होंने भारत के झंडे को फहराया । यह हर एक भारतीय के लिए गौरव के पल थे । जिसे अरुणिमा ने करके दिखाया ।

अरुणिमा ने यह साबित करके दिखाया कि परिस्थिति कैसी हो चलते रहना ही संघर्ष है । वह महिला होने के साथ-साथ अपंग थी । फिर भी उसने एवरेस्ट की चढ़ाई को पार किया । वह भारत की पहली अपंग महिला थी । जिन्होंने एवरेस्ट की चढ़ाई को पूरा किया । अरुणिमा ने भारत के उन सभी लड़कियों का मान बढ़ाया । जिन्हें लगता है कि, वह कुछ कर नहीं सकती । अरुणिमा सिन्हा जैसी महिला भारतीय गौरव का प्रतीक है । इन्होंने ना केवल भारत के गौरव को बढ़ाया । अपितु भारत के उन सभी महिलाओं को गौरवान्वित किया । जो किसी न किसी वजह से डिसेबिलिटी का सामना कर रही हैं । उन्होंने यह साबित करके दिखा दिया कि परिस्थिति कितनी भी खराब क्यों ना हो, संघर्ष और जुनून से हर एक मंजिल पर फतेह की जा सकती है ।

Arunima Sinha

अरुणिमा बहुत ही दरिया दिल महिला है । वह अपने नेक्स्ट प्रोजेक्ट में पूर्ण रूप लग चुकी है । इन्होंने एवरेस्ट के अलावा साउथ अफ्रीका की पहाड़ियों के बीच चढ़ाई भी की है । और उनका नेक्स्ट प्रोजेक्ट है । भारत में उपस्थित सभी विकलांगों के लिए कुछ ठोस कदम उठाना । बताते चलें, अरुणिमा ने कानपुर उन्नाव में कई एकड़ की जमीन खरीदी है । जिसमें वह एक विकलांग भवन बनाना चाहती हैं । जिसमें ₹55 करोड़ की लागत लगेगी । अब देखने वाली बात यह है कि, यह सपना अरुणिमा का कब पूरा होता है । हालांकि, इसमें सरकार यदि उनकी मदद करती है तो, यकीनन यह सपना जल्दी पूरा हो जाएगा । और सरकार यदि इस काम में हाथ नहीं बटाती है तो, यकीनन अरुणिमा को बहुत सारे साल लग जाएंगे । बताते चलें, अरुणिमा ने 120 से भी अधिक विकलांगों को गोद लिया है । तथा उनका पालन पोषण करते हैं ।

आज भारत को ऐसे ही कई अरुणिमा सिन्हा (Arunima Sinha) की जरूरत है । जब हमारे देश में महिलाओं को ऊंच नीच और समाज के दुर्व्यवहार से देखा जाता है । इन्हें पुरुषों से कम समझा जाता है । इनके पर कई अत्याचार लूट, रेप तथा मर्डर तक आम हो चुके हैं । ऐसे में अरुणिमा जैसी महिला भारतीय समाज को नई दिशा दिखाने में कामयाब हुई है । इन्होंने भारतीय महिलाओं के लिए एक रास्ता तैयार किया है । जिसमें सभी महिलाएं चलकर अपना भविष्य सुदृण और सुनिश्चित कर सकती हैं ।

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